Son Can’t Claim Coparcenary Share In Father’s Inherited Property Unless HUF Is Established: Rajasthan High Cour
पिता को विरासत में मिली संपत्ति पर बेटा सिर्फ रिश्ते के आधार पर हक नहीं मांग सकता: राजस्थान HC
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि पिता को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 8 के तहत मिली संपत्ति, यदि HUF या coparcenary property होने का कोई ठोस आधार नहीं है, तो केवल पिता का बेटा होने के कारण उस पर जन्मसिद्ध अधिकार नहीं बनाया जा सकता। जस्टिस फरजंद अली की पीठ एक कृषि भूमि से जुड़े विवाद में सुनवाई कर रही थी। यह जमीन मूल रूप से याचिकाकर्ता के दादा को आवंटित हुई थी और बाद में उनके तीन बेटों, जिनमें याचिकाकर्ता के पिता भी शामिल थे, को मिली।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि पिता का बेटा होने के कारण उसे संपत्ति में जन्म से coparcenary अधिकार प्राप्त है और उसकी सहमति के बिना जमीन की बिक्री नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने क्या कहा? कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने यह साबित करने के लिए कोई ठोस दलील या सामग्री नहीं दी कि संपत्ति HUF या coparcenary property के रूप में बनी रही। कोर्ट ने कहा कि धारा 8 के तहत उत्तराधिकार होने के बाद उत्तराधिकारी अपने व्यक्तिगत अधिकार में संपत्ति प्राप्त करते हैं। केवल इस आधार पर कि संपत्ति पहले दादा की थी, उसे संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्ति नहीं माना जा सकता।
Son Can’t Claim Coparcenary Share In Father’s Inherited Property Unless HUF Is Established: Rajasthan High Cour
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 4 को अकेले आधार बनाकर किसी संपत्ति को पैतृक या coparcenary नहीं माना जा सकता। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने सक्षम राजस्व अदालत से अपने खातेदारी अधिकारों की घोषणा भी नहीं कराई थी। इसलिए सिविल कोर्ट बिक्री विलेखों की वैधता पर तब तक विचार नहीं कर सकता, जब तक याचिकाकर्ता अपना वैध अधिकार साबित न कर दे।
हाईकोर्ट ने कहा कि बेटा केवल पिता का पुत्र होने के आधार पर 1/9वां coparcenary हिस्सा नहीं मांग सकता और पिता के जीवनकाल में संपत्ति के विभाजन का अधिकार भी नहीं है। अंततः हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

