लापरवाह ठेकेदार को दे दिया गर्ल हास्टल बनाने का कांट्रेक्ट,कार्य पूरा करने के लिए चार बार बढ़ाई समय सीमा

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ज्यादातर कार्य अधूरा, समय पर पूरा होना मुश्किल
अजमेर, 20 मार्च (ब्यूरो) : अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने जेएलएन पीजी गर्ल हास्टल बनाने का ठेका लापरवाह कंाट्रेक्टर को दे दिया है। चार बार कार्य पूरा करने के लिए समय सीमा बढ़ाई जा चुकी है। हालात यह है कि हास्टल की कमी की वजह से मेडिकल की छात्राएं किराए के मकान में कमरा किराए पर लेकर पढ़ाई पूरा कर रही है। तीन बार कार्य पूरा करने के लिए समय बढ़ाने के बावजूद अभी बाहरी हिस्से का प्लास्टर हो रहा है। फिनिसिंग कब होगी और छात्राओं को हास्टल कब अलाट होगा यह बताना मुश्किल है। एक भी टायलेट तैयार नहीं है। इलेक्ट्रिक वायरिंग का आधा से ज्यादा कार्य बाकी है। वाटर टैंक पर अभी लैटर ही पड़ा है। पानी की पाईप लाईन डाली जा रही है। ऐसे में नहीं लगता कि तीसरी बार दिए समय पर भी कार्य पूरा हो पाएगा।
दो साल पहले दिसंबर में दिया ठेका
अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने कंसट्रक्षन आफपीजी गर्ल हास्टल एट जेएलएन अस्पताल का ठेका मेसर्स अंकित कंस्ट्रक्षन को 19 दिसंबर 2020 को दिया था। कार्य पूरा करने की समय सीमा एक साल यानी 19 दिसंबर 2021 दिया गया था। इस ईमारत को बनाने का ठेका कंपनी को 6.16 करोड़ रूपये में दिया गया था। दूसरा साल भी निकल गया और कार्य पूरा नहीं हो सका। लिहाजा एक और तारीख बढ़ा कर 31 दिसंबर 2022 कर दिया गया। फिर भी कार्य पूरा नहीं हुआ तो मजबूर होकर प्रशासन को एक और तारीख देनी पड़ी है। नई डेट लाईन 31 मार्च 2023 तय की गई है। तीन बार डेट बढ़ाने पर भी कार्य उसी सुस्ती से चल रहा है और ठेकेदार की लापरवाही से प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं हो रहा है। साख अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड की खराब हो रही है।

यह कार्य अभी बाकी
चारों मंजिल पर टाईल्स लगने का कार्य अभी बाकी है। ग्राउंड फ्लोर पर मार्बल लगा है लेकिन उसकी घिसाई होनी बाकी है। एक भी टायलेट तैयार नहीं है। पहली मंजिल पर 29 कमरों में रहने वाली 40 छात्राओं के लिए महज छह टायलेट है। जबकि अन्य मंजिल पर कमरे के साथ बाथरूम अटैच हैै। ऐसे में ग्राउंड फ्लोर पर रहने वाली छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। सभी कमरों में अंडरग्राउंड वायरिंग पाईप पड़ी है लेकिन तार डालने का कार्य अभी बाकी है। विकलांग छात्राओं के लिए बना रैंप अधूरा है। उसकी फिनिसिंग नहीं हुई है।
120 छात्राओं के लिए महज एक ही लिफ्ट
एक मंजिल पर 20 कमरे हैं। तीन मंजिल पर कुल 60 कमरों में 120 छात्राएं रह सकेगी। छात्राओं की संख्या को देखते हुए इतने बड़े कंाप्लेक्श में महज एक लिफ्ट लगाने की जगह छोड़ी गई है। लिफ्ट कब तक लगेगी, इसका कोई अंदाजा नहीं है। जब बिल्डिंग ही अधूरी है तो लि$फ्ट लगाने का कोई मतलब भी नहीं है। हास्टल के दो गेट है। दूसरे गेट पर अभी तक रैंप और सीढ़ी ही नहीं बना है। उसे ही बनाने में महीने भर का समय लग जाएगा। ऐसे में यह अनुमान लगाया जा सकता है कि प्रशासन को फिर से मजबूर होकर एक बार और डेट लाईन बढ़ानी पड़ेगी।

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