खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की 17 साल बाद बांग्लादेश वापसी

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 साल बाद देश लौट आए हैं। वे गिरफ्तारी से बचने के लिए 2008 में लंदन भाग गए थे। तब हसीना सरकार में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले चल रहे थे।

आज तारिक के स्वागत में उनकी पार्टी BNP के 1 लाख से ज्यादा कार्यकर्ता जुटे। ढाका एयरपोर्ट से लेकर 300 फीट रोड तक रोड शो किया। इस 13 किलोमीटर के रास्ते को कवर करने में उन्हें 3 घंटे का समय लगा।

तारिक ने 17 मिनट भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम देश में शांति कायम करेंगे और नया बांग्लादेश बनाएंगे। हालांकि उन्होंने शेख हसीना को लेकर एक शब्द भी नहीं कहा।

बांग्लादेश में अगले साल 12 फरवरी को आम चुनाव होने हैं। खालिदा जिया के बीमार होने की वजह से माना जा रहा है कि रहमान अगले PM के दावेदार हो सकते हैं।

अपने पिता पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बंगले में रुकेंगे तारिक
तारिक रहमान गुरुवार को स्वागत समारोह के बाद, वे एवरकेयर अस्पताल जाएंगे, जहां उनकी मां, पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी अध्यक्ष खालिदा जिया का 23 नवंबर से इलाज चल रहा है।

अस्पताल से तारिक गुलशन एवेन्यू स्थित अपने आवास जाएंगे। खालिदा बगल वाले घर में रहती हैं, जिसे “फिरोजा” के नाम से जाना जाता है।

जिस बंगले में तारिक रहेंगे, वह तारिक के पिता दिवंगत राष्ट्रपति जियाउर रहमान का है। रहमान की हत्या के बाद यह घर उनकी पत्नी खालिदा जिया को दिया गया था।

रहमान के बांग्लादेश लौटने के क्या मायने?
जून में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने अपनी यूके की यात्रा के दौरान तारिक रहमान से मुलाकात की थी। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुलाकात के बाद से उन्हें बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखा जा रहा है।तारिक रहमान की मां खालिदा जिया की उम्र 80 साल है। वे लंबे समय से बीमार चल रहीं हैं और फिलहाल आईसीयू में भर्ती हैं। खालिदा ने नवंबर में चुनाव प्रचार का ऐलान किया था, जिसके कुछ ही दिनों बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई।

अभी तारिक BNP के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। वे बांग्लादेश लौटकर पार्टी की कमान अपने हाथ में ले सकते हैं। 15 दिसंबर 2025 को लंदन से एक वर्चुअली आयोजित सभा में चुनावों को लेकर उन्होंने कहा था,

ये कोई साधारण चुनाव नहीं है, बल्कि पहले के किसी भी चुनाव से बेहद जटिल और महत्वपूर्ण है। अगला दशक परिवर्तन का दशक होगा।

शेख हसीना की पार्टी पर बैन लगने के बाद BNP बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी मानी जा रही है। यूनुस सरकार बांग्लादेश में जारी हिंसा के बीच चुनाव कराने की तैयारी कर रही है। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार अमेरिकी एंबेसेडर सर्जियो गोर को आश्वासन दे चुके हैं कि चुनाव तय की गई तारीख 12 फरवरी 2026 को ही होंगे।

रहमान को चुनाव में कौन चुनौती देगा?

जुलाई 2024 में शेख हसीना के खिलाफ हुए आंदोलन में बांग्लादेशी इस्लामिक संगठन जमात-ए-इस्लामी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। हसीना सरकार ने हिंसा भड़काने के आरोप में जमात और उसके छात्र संगठन इस्लामी छात्र शिबिर पर बैन लगा दिया था।

हालांकि, अगस्त 2024 में अंतरिम सरकार ने जमात-ए-इस्लामी से बैन हटा दिया था और जून 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी का रजिस्ट्रेशन भी बहाल कर दिया था।

जमात-ए-इस्लामी के छात्र संगठन से जुड़े युवाओं ने हसीना के देश छोड़ने के बाद नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) का गठन किया, जिसके कुछ नेता बांग्लादेश की कार्यवाहक सरकार में भी शामिल हैं।

अवामी लीग के चुनावी मैदान में न होने के बाद BNP के सामने NCP ही एकमात्र प्रमुख चुनौती मानी जा रही है। हालांकि, बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी का पिछले चुनावों में समर्थन इतना अच्छा नहीं रहा कि वो अकेले अपने दम पर चुनाव जीत पाए।

शेख हसीना की पार्टी इन चुनावों में शामिल नहीं होगी। मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम का कहना है कि अवामी लीग को चुनाव में भाग लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

तारिक के बांग्लादेश लौटने से भारत पर क्या असर पड़ेगा?
जेएनयू में इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर राजन कुमार के मुताबिक, तारिक रहमान का ऐसे समय में बांग्लादेश लौटना बड़ी घटना है। हालांकि, उनके पीएम बनने को लेकर इतनी जल्दी कुछ कहा नहीं जा सकता, क्योंकि जमात-ए-इस्लामी भी अपना पीएम कैंडिडेट खड़ा करने की तैयारी में है।

राजन बताते हैं कि यदि इन सबके बाद भी तारिक प्रधानमंत्री बन जाते हैं, तो भारत को बांग्लादेश के मुद्दे पर अपनी डिप्लोमेसी तेज करनी होगी, क्योंकि तारिक के कार्यकाल में इस्लामिक कट्टरपंथियों को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे बांग्लादेशी हिंदू प्रभावित होंगे।

वे पाकिस्तान के साथ काफी समय से होल्ड पर रखे गए डिफेंस एग्रीमेंट पर साइन कर सकते हैं, जिससे बांग्लादेशी सीमा से लगे राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम की सुरक्षा करना भारत के लिए चुनौती बन सकता है।

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